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कर्तव्यनिष्ठा का पर्याय: हेड कांस्टेबल पवन मजोका को मिला राष्ट्रपति सम्मान

 

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गंगानगर (कृष्ण आसेरी) पुलिस के बेड़े में अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की चमक बिखेरने वाले पवन मजोका ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो अभाव भी राह नहीं रोक सकते। 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उन्हें उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया, जो न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे श्रीगंगानगर जिले के लिए गौरव का क्षण है।पवन मजोका का जन्म 1 जुलाई 1970 को श्री रोशन लाल जी के घर हुआ। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण जीवन की डगर आसान नहीं थी। छोटी सी उम्र में कंधे पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने अपनी शिक्षा के साथ-साथ कठिन शारीरिक श्रम (हार्ड वर्किंग कार्य) किया ताकि घर का चूल्हा जलता रहे और पढ़ाई भी जारी रहे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पुरानी आबादी स्थित राजकीय विद्यालय और सेकेंडरी शिक्षा मल्टीपरपज स्कूल, श्रीगंगानगर से पूर्ण की।खाकी का सफर: 1989 से आज तकपवन जी के पुलिस करियर की शुरुआत 28 अक्टूबर 1989 को बतौर कांस्टेबल हुई। बीकानेर में बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी कार्यशैली ने अधिकारियों का ध्यान खींचा।करीब डेढ़ साल करणपुर चालानी गार्ड में सेवाएं दीं।सीआईडी (CID) में वर्ष 1992 से 2007 तक और फिर 2012 से अब तक उन्होंने अपना अधिकांश समय जिला विशेष शाखा (CID) में बिताया। खुफिया विभाग (सीआईडी) जैसी चुनौतीपूर्ण शाखा में उनका लंबा अनुभव उनकी सूझबूझ और कार्यकुशलता का प्रमाण है।वर्ष 2017 में उन्हें हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत किया गया। अपनी बेदाग सेवा के दौरान उन्हें पूर्व में भी उत्तम, अति उत्तम और सर्वोत्तम सेवा चिन्हों से सम्मानित किया जा चुका है।पवन मजोका जी ने न केवल समाज की रक्षा की, बल्कि अपने बच्चों को भी उच्च संस्कार और शिक्षा दी। आज उनका परिवार समाज में प्रतिष्ठित पदों पर अपनी सेवाएं दे रहा है:उनका एक बेटा हरियाणा पुलिस में देश सेवा कर रहा है।बेटा और बहू बैंक क्षेत्र में कार्यरत होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।पवन मजोका का जीवन उन युवाओं के लिए एक नजीर है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। एक साधारण कांस्टेबल से राष्ट्रपति पदक तक का यह सफर ईमानदारी, लगन और अटूट मेहनत की मिसाल है। उनकी इस उपलब्धि पर विभाग और जिला प्रशासन को गर्व है।कर्तव्य पथ पर बढ़ते चरण, जब ईमानदारी का चोला पहनते हैं, तो सफलता खुद-ब-खुद राष्ट्रपति के सम्मान तक पहुँचा देती है।

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